Tuesday, May 3, 2016

चार बांस चौबीस गज
अंगुल अष्ट प्रमाण
ता ऊपर सुल्तान है
मत चूको चौहान।
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उपरोक्त पंक्तियाँ महान कवि चंदरबरदाई जी ने लिखी है, मेरा इतना साहस और ज्ञान नहीं के यह जान सकु की उक्त पंक्तियों के आगे क्या लिखा होगा उन्होंने परन्तु आपने अनुसार भाव और समय को देखते हुए कुछ पंक्तिया को लिखने का प्रयास किया है.…… अगर किसी मित्र की भावना आहत हो तो कृपया क्षमा प्रदान करें
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मत चूको चौहान
कर अब यह प्रण भारी
अफ़ग़ानों के चौक चौराहे
नही बिकेंगे हिन्दू नर नारी
लाज रखो धर्म क्षात्र
देकर तुम अपने प्राण
ऊपर बैठा सुलतान है
मत चूको चौहान
मत चूको चौहान
खींचो अपना कोदंड
बीध गला गोरी का
दो उसको कर्मो का दंड
कर्मो का दो दंड
औरों को हो भय भारी
अपने सुतों से कहे
न छेड़ो राजपूत नर नारी
रक्त से लिख इतिहास
दो अगली नस्लों को ज्ञान
जो लौटे गौरी सा दस्यु फिर
हर कुँवर बने पृथ्वीराज चौहान
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आपका अपना
रवि कुमार “रवि

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